40 से ज्यादा बम ब्लास्ट और प्लानिंग का आरोपी आख़िरकार दोषी साबित, लश्कर-ए-तैयबा का बम एक्सपर्ट माना जाता है सैयद अब्दुल करीम

सोनीपत के एक सिनेमा हॉल में 28 दिसंबर, 1966 को बम धमाके हुए जिनमें कई लोग घायल हुए थे. इन बम धमाकों के लिए सोनीपत की एक अदालत ने सैयद अब्दुल करीम टुंडा को दोषी करार दिया है. ये पहली बार है कि लश्कर-ए-तैयबा के बम एक्सपर्ट माने जाने वाले सैयद अब्दुल करीम टुंडा को किसी मामले में दोषी करार दिया गया हो.

सैयद अब्दुल करीम टुंडा का नाम पहले भी कई मामलों में आ चूका है. सैयद अब्दुल करीम टुंडा का नाम 40 से ज्यादा बम ब्लास्ट और उनकी प्लानिंग में आ चूका है लेकिन हर बार अदालत में कुछ भी साबित नही हो पाया और सैयद अब्दुल करीम टुंडा बरी हो गया.

मार्च 2016 में हरियाणा, गाजियाबाद, हैदराबाद और अजमेर में हुए बम ब्लास्टों के मामलों में दिल्ली की एक अदालत ने सैयद अब्दुल करीम टुंडा को बरी कर दिया था. टुंडा पर बाबरी मस्जिद गिरने का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के कुछ लोगों के साथ मिलकर देश में कई जगह बम ब्लास्ट कराये जाने का आरोप था.

सैयद अब्दुल करीम टुंडा को अगस्त 2013 में इंडिया-नेपाल बॉर्डर के नजदीक रक्सौल से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था. पहले कई मामलों में बरी होने के बाद अब आख़िरकार सोनीपत सीरियल ब्लास्ट मामले में टुंडा पर दोष साबित हो ही गया. कल 10 अक्टूबर, 2017 को सोनीपत की एक अदालत टुंडा की सज़ा का ऐलान करेगी.

कहा जाता है की बम बनाने के दौरान ही सैयद अब्दुल करीम का एक हाथ उड़ गया था जिसके बाद इसका नाम टुंडा पड़ गया था. पाकिस्तान के कई आतंकवादी संगठनों और आईएसआईएस से टुंडा का संबंध बताया जाता है. 1994 में गाजियाबाद में हुए बम ब्लास्ट में टुंडा का नाम आया जिसके बाद टुंडा फरार हो गया.

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