अंधविश्वास के अंधकार में यहां लोग मृतकों के साथ करते है कुछ ऐसा कि भरोसा करना मुश्किल

भारत त्योहारों, उत्सवों, परम्परा  और आस्था का देश है। यहां विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग रहते हैं. सबकी अपनी-अपनी मान्यताएं और धार्मिक विश्वास हैं लेकिन कभी-कभी यही आस्था और विश्वास अंधविश्वास में बदल जाता है. आस्था के नाम पर भारत में कई अजीबोगरीब मान्यताएं हैं.

आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताते है जहाँ मृतकों की होती है शादी. शादी जीवित लोगों की परंपरा है पर भारत में एक ऐसा समाज भी है जहां मृत बच्‍चों की शादी की की जाती है.

भारत के उत्‍तर प्रदेश में सहारनपुर शहर के निकट एक नटों का गांव है, जो रस्‍सी पर चलने की कलाबाजी दिखाते हैं. इस गांव में एक अनोखी प्राचीन परंपरा का पालन आज भी किया जाता है. इस परंपरा के तहत गांव वाले अपने परिवार के मृत बच्‍चों का विवाह बिलकुल जीवित लोगों के ब्‍याह की तरह आयोजित करते हैं. इनका विश्‍वास है कि ऐसा करने से उनके स्‍वर्गवासी बच्‍चों की आत्‍मा को शांति मिलेगी और वो मोक्ष प्राप्‍त करेंगे.

मृत पुत्र और पुत्री वाले अपने सालों पहले ही गुजर चुके बच्‍चों के रिश्‍ते आपस में तय कर देते हैं. इसमें वर और वधु दोनों ही मर चुके होते हैं. इसके बाद उन दोनों के प्रतीक स्‍वरूप गुड्डे गुड़िया बनाये जाते हैं और उनकी धूम धाम से सारे रीति रिवाजों के साथ शादी की जाती है.

विवाह में पूरा समाज इकठ्ठा होता है और नाच गाने से ले कर प्रीति भोज तक सब किया जाता है. नटों के इस समाज में ऐसा करने के बाद उम्‍मीद की जाती है कि मृतकों को दूसरी दुनिया में सभी कष्‍टों से मुक्‍ति मिल गई होगी.

भारत में अंधविश्वास एक व्यापक सामाजिक समस्या माना जाता है. लोग यह कहते है कि अंधविश्वासों का कारण शिक्षा की कमी है लेकिन भारत में शिक्षित लोगों को भी अंधविश्वासी माना जा सकता है क्योंकि शिक्षित होने के बावजूद लोग अपनी ऐसी  परम्पराओं का निर्वहन भी करते है, जिनके करने का कोई मतलब नहीं है.

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