माओवादियों से संबंध रखने के आरोप में डीयू प्रोफेसर साईबाबा व JNU स्टूडेंट हेमंत सहित 6 को उम्रकैद की सजा

आज गढ़चिरौली सेशंस कोर्ट ने माओवादियों से संबंध रखने के आरोपी डीयू प्रोफेसर जीएन साईबाबा मामले में अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने आज मंगलवार, 7 मार्च को डीयू प्रोफेसर जीएन साईबाबा को इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है. जीएन साईबाबा के अलावा कोर्ट ने पांच अन्य को भी उम्र कैद की सजा सुनाई है.

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जीएन साईबाबा व पांच अन्य को उम्र कैद की सजा सुनाने के साथ ही इस मामले में एक अन्य दोषी टिरके को भी 10 साल कारावास की सजा सुनाई है. गौरतलब है कि नौ मई, 2014 को दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जीएन साईबाबा को माओवादियों के साथ संबंध रखने के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया था.

पुलिस ने गिरफ़्तारी के वक्त जीएन साईबाबा पर भाकपा-माओवादी का सदस्य होने तथा उनकी मदद करने के आरोप में पकड़ा गया था. जीएन साईबाबा दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर हैं.

पुलिस ने बताया कि उन्होंने पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) के छात्र हेमंत मिश्रा को गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद हेमंत से जाँच के दौरान प्रोफ़ेसर जीएन साईबाबा का नाम सामने आया. हेमंत ने जांच एजेंसियों को बताया कि वो वह छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में छिपे माओवादियों और प्रोफेसर के बीच कूरियर का काम करता है.

गढ़चिरौली कोर्ट ने साईबाबा और जेएनयू स्टूडेंट हेम मिष्ठा समेत 6 आरोपियों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) एक्ट की धारा 13, 18, 20, 38, 39 और आईपीसी की धारा 120 B के तहत दोषी करार दिया है.

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