108 बोरी आलू बेचने पर किसान को जेब से देने पड़े 773 रुपये, ऐसे में किसान आलू सड़क पर ना फैंके तो क्या करे

देश में किसान की बदतर हालत किसी से छिपी नही है. हर बार जब चुनाव आते हैं तो नेता किसान से वोट के लिए खूब वादे करते है, किसान को खूब सपने दिखाते है लेकिन चुनाव के बाद वो किसान से किये अपने वादे भूल जाते हैं. हर साल हजारों किसान अपनी बद से बदतर होती हालत के कारण आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

farmers throwing potato on road

स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार किसान को लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा मिलना चाहिए लेकिन मुनाफा तो दूर की बात है कई बार किसान अपनी फसल मंडी में बेचने के बजाय सड़क पर फैंकने पर मजबूर हो जाता है.

इंदौर के ईश्वरखेडी गाँव के एक किसान राजकुमार चौधरी को तो मंडी में आलू बेचने पर अपनी जेब से पैसे देने पड़ गये. रामकुमार चौधरी 25 फरवरी को 108 बोरी आलू लेकर मंडी में बेचने पहुंचे. रामकुमार ने सोचा की उसे ये आलू बेचकर थोड़ा बहुत पैसा तो मिल ही जायेगा लेकिन जब बिल बनकर आया तो रामकुमार चौधरी की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया.

मंडी में जो बिल बना वो था -773 रुपये, मतलब अब रामकुमार को अपनी जेब से 773 रुपये देने थे. मंडी ने आलू 15 रुपये प्रति बोरी खरीदा और इस हिसाब से कुल 108 बोरी के 1620 रुपये हुए. अब आलू मंडी तक लाने का गाड़ी खर्चा व पलदारी का खर्चा हो गया 2393 रुपये. रामकुमार को 773 रुपये अपनी जेब से चुकाने पड़े.

potato receipt

इसके दो पहले भी रामकुमार 50 बोरी आलू लेकर मंडी पहुंचा था तो उसे मंडी से 1 रूपया मिला था. जब किसान को अपनी फसल बेचने पर अपनी जेब से रूपया देना पड़ेगा तो वो उसे सड़क पर ही फैंकेगा, उसके पास कोई दूसरा विकप्ल नही है. इन्ही कारणों से किसान पर कर्जा बढ़ रहा और किसान को आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.