11वीं पास किसान ने घर में 3 छात्रों से शुरू की स्कूल, आज 1,320 छात्र पढ़ते हैं इनकी स्कूल में

शिक्षा का हमारे जीवन में बहुत महत्त्व है. शिक्षा जहां कुछ लोगों के लिए व्यवसाय है तो कुछ लोगों के लिए समाज को बदलने का एक मिशन. अपने गांव में शिक्षा को लेकर एक ऐसा ही मिशन उत्तरप्रदेश के किसान केशव सारण ने उठाया है और वे इसमें सफल भी हुए हैं. केशव सारण उत्तरप्रदेश के रामपुर जिले के खारडिया गांव के रहने वाले हैं.

keshav school

केशव 1988 में अपने गांव के मुखिया चुने गये तो उन्होंने अपने गांव में खूब विकास किया. केशव ने इस दौरान खूब भाग दौड़ की और लगातार अधिकारियों से मिलकर अपने गांव को आगे बढ़ाया. केशव 11वीं कक्षा तक पढ़े हुए हैं. अधिकारीयों से मिलकर उन्हें अहसास हुआ कि अगर वे ज्यादा पढ़े होते तो वे अपने गांव के लिए बेहतर कर सकते थे.

केशव ने निर्णय लिया कि वे अपने गांव के इस व्यक्ति को शिक्षित करेंगे. इसके लिए उन्होंने अपने घर में रात के समय अपने हमउम्र लोगों पढ़ना शुरू कर दिया. फिर केशव को महसूस हुआ कि गांव में कई परिवार अपने बच्चों को स्कूल नही भेज रहे हैं खासकर लड़कियों को क्योंकि गांव में कोई स्कूल नही था और सबसे नजदीकी स्कूल भी करीब 6 से 7 किलोमीटर दूर था.

केशव ने ऐसे बच्चों को अपने घर पर पढ़ाने का फैसला किया. पहले दिन सिर्फ 3 बच्चे ही पढ़ने आये लेकिन केशव का उत्साह कम नही हुआ. वे लगातार गांव के लोगों से उनके बच्चों को भी पढ़ाने के लिए प्रेरित करते रहे. धीरे-धीरे स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी.

जब शिक्षा मंत्री को केशव के स्कूल के बारे में पता चला तो वे भी स्कूल देखने आये और स्कूल को रजिस्टर करने में मदद की. अब केशव की इस स्कूल में 1,320 छात्र हैं. केशव ने अपने लग्न से जो काम किया है आज उसक फायदा पुरे गांव को मिल रहा है.

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