अब बायनॉकुलर डिवाइस से भारतीय सेना रात के अंधेरे में भी पहचान सकेगी दुश्मन को

भारतीय सेना बड़ी मुश्तेदी से बॉर्डर पर नजर लगाए रखती है ताकि कोई आतंकी या दुश्मन हमारे देश में ना घुस सके. बॉर्डर पर नजर रखना आसान नही है और रात के अंधेरे में तो ये काम ज्यादा मुश्किल हो जाता है. रात के अंधेरे में भारतीय सेना के लिए सबसे बड़ी समस्या आती है की वो आम आदमी व दुश्मन के बीच फर्क कैसे करे क्योंकि रात को साफ़ नही दिखाई देता है.

indian army

अब तक बॉर्डर पर लगे जवान रात को जो नाइट विजन बायनॉकुलर काम में लेते थे उससे रात के वक्त आकृति की पहचान उतनी स्पष्ट नहीं हो पाती थी. ऐसे में सामने दुश्मन है या कोई आम आदमी, इसे लेकर जवानों में संशय रहता था लेकिन अब ये समस्या दूर होने वाली है.

अब भारतीय सेना रात के अंधेरे में भी कई सौ मीटर दूर खड़े शख्स को आसानी से पहचान लेगी की वो दुश्मन है या कोई आम आदमी. यह सब संभव होगा नई नाइट विजन बायनॉकुलर से. सेना के जवानों के लिए इस नई दूरबीन को तैयार करने में सफलता हासिल की है देहरादून की आर्डनेंस फैक्ट्री ने.

पहली खेप के रूप में 80 बायनॉकुलर डिवाइस सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को मुहैया कराई गई हैं. सेना के समक्ष इसका ट्रायल भी किया जा चुका है और अगले वित्तीय वर्ष में सेना के लिए उत्पादन भी शुरू कर दिया जाएगा. इस वर्ष 200 नाइट विजन साइट तैयार की गई हैं. मांग के अनुरूप इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी.

इस नए नाइट विजन बायनॉकुलर डिवाइस का वजन भी पहले के मुकाबले करीब 300 ग्राम कम है. इससे रात के अंधरे में 500 मीटर दूरी तक देखा जा सकता है.

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