मौत से ना डरने वाले ISIS आतंकी भी इस कुर्दिश महिला फौज के सामने खौफ खाते है

पिछले कुछ सालों में ISIS आतंकियों ने पूरी दुनिया में अपने हमलों से खूब आतंक मचाया है. इन आतंकियों को लगता है की अगर वे मर भी गये तो उन्हें जन्नत मिलेगी जहाँ हुर परियां इनके इंतजार में बैठी है. मौत से भी नही डरने वाले ISIS आतंकीयों को डर लगता है तो बस इस महिला फौज का, कारण? अभी बताते हैं.

दरअसल अपनी मौत को जन्नत का रास्ता समझने वाले ISIS आतंकियों को लगता है की अगर वे किसी महिला के हाथों मारे गये तो शायद उन्हें जन्नत नसीब नही होगी. इसी कारण ISIS आतंकी कभी नही चाहते की उनका सामना किसी महिला फौज से हो. उसे लगता है की अगर वो किसी महिला के हाथों मारा जायेगा तो वो जन्नत नही दोजख पहुंचेगा.

ISIS आतंकियों से लोहा लेने वाली ऐसी ही एक महिला फौज है पेशमरगा फौज. पेशमरगा फौज की कुर्द औरतें नेल पॉलिश लगे हाथों से हथियार बड़ी मजबूती के साथ पकड़ती हैं. कुर्द समाज में महिला लड़ाकों की पुरानी परम्परा रही है.

जो कुर्द महिला फौज आज ISIS आतंकियों से लड़ रही है वो पहले इराक में सदाम हुसैन की तानाशाही के खिलाफ भी लड़ चुकी हैं. उससे पहले ओटोमन साम्राज्य से और ब्रिटेन से लड़ाई लड़ी.

कुर्दिश में एक शब्द है झिनी शाख जिसका मतलब है है पहाड़ों में रहने वाली औरतें. गुरिल्ला वॉर. छापामार युद्ध. घात लगाकर हमला करो और फिर यूं गायब हो जाओ कि कभी थे ही नहीं. इन्हीं औरतों को ‘झिनी शाख’ कहते थे.

कुर्द समाज की गिनती इस्लामिक समाज के सबसे प्रगतिशील समुदायों में होती है. कुर्द समाज महिलाओं को बराबरी का हक़ देता है जिसके कारण कट्टरपंथी मुसलमानों को ये समाज फूटी आंख नहीं भाते. आज के समय में जितनी आजादी कुर्द औरतों को है, उतनी शायद इस्लामिक समाज में किसी और जगह की औरतों को नही है.

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