नाम बना जी का जंजाल! नही मिल रही नौकरी, 6 महीने में 40 बार रिजेक्ट

विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि “नाम में क्या रखा है?” लेकिन ये बात हर जगह सही साबित नही होती. हाँ, नाम की वजह से हमने कई बार मजाक बनते तो देखा है लेकिन झारखण्ड के जमशेदपुर के रहने वाले एक मरीन इंजिनियर को अपने नाम की वजह से नौकरी नही मिल रही है. पिछले 6 महीने में इनको 40 बार रिजेक्ट किया जा चूका है.

ये स्टोरी हैं झारखण्ड के जमशेदपुर के रहने वाले एक मरीन इंजिनियर की जिनका नाम सदाम हुसैन है. सदाम हुसैन तमिलनाडु के नुरुल इस्लाम यूनिवर्सिटी से पास आउट हैं. ऐसा भी नही है कि सदाम में प्रतिभा नही है. सदाम फर्स्ट डिवीज़न से पास है और अपनी क्लास में दूसरा स्थान भी मिला है लेकिन सदाम हुसैन नाम उनके लिए जी का जंजाल बन चूका है.

सदाम हुसैन को पिछले 6 महीने में 40 बार रिजेक्ट किया जा चूका है. उन्हें किसी भी मल्टीनेशनल शिपिंग कंपनी ने नौकरी पर नही रखा. जब उन्होंने इस बारे कंपनियों के HR डिपार्टमेंट से बात की तो उन्हें पता चला की उनके साथ ये सब उनके नाम की वजह से हो रहा है.

उन्हें HR डिपार्टमेंट से पता चला की उनके नाम का क्रू सदस्य रखने से बेवजह ही लोगों का शक़ बना रहता है. ये किसी भी शिपिंग कंपनी के लिए अच्छा नहीं है. अपने नाम से परेशान सदाम हुसैन ने अपना नाम बदलने का फैसला ले लिया और आधिकारिक तौर पर बदलकर साजिद हुसैन कर लिया है लेकिन समस्या फिर भी बनी हुई है.

नाम बदलने के बावजूद अभी भी नौकरी के लिए जरुरी दस्तावेजों जैसे 10वीं और 12वीं के सर्टीफिकेट्स में उसका नाम अभी भी सद्दाम हुसैन ही है. हुसैन ने इसके लिए सीबीएसई के सामने गुहार लगाई, लेकिन कोई फायदा नही हुआ. अब हुसैन ने अदालत की ओर रुख किया है. हुसैन ने झारखंड हाई कोर्ट के सामने दलील पेश की है कि सीबीएसई उसे नए नामों के दस्तावेज़ उपलब्ध कराए.

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