आजादी से अब तक 70 सालों में मिशाल बना ये गाँव, पूरा देश ऐसा हो जाये तो मजा आ जाये

आज के इस दौर में धूम्रपान बड़ी विकराल समस्या है,खास तौर से युवा वर्ग को नशीले पदार्थो के सेवन करने की लत लगी हुई है.धुम्रपान व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक व आर्थिक विकास के लिये बड़ा खतरा है. धुम्रपान से कैंसर होता है,ये सभी जानते है, फिर भी तम्बाकू व सिगरेट का सेवन लोग बड़ी तादात में करते है.आज हम आपको एक ऐसे गांव से रूबरू करवाते है जो हमारे लिये मिसाल बनकर खड़ा है.

हरियाणा में राजस्‍थान के बार्डर पर ये आर्दश गांव स्‍थित है। इस गांव का नाम है टीकला. गांव की कुल आबादी लगभग 1500 है। इस गांव में कई दशक से एक भी ऐसा आदमी नहीं है जिसने कभी भी धूम्रपान और शराब का सेवन किया हो.

ये गांव वाकई में आदर्श है और वर्तमान दौर में अनोखा भी क्‍योंकि कई पीढ़ियों से इस गांव के रहने वाले एक भी शख्‍स ने बीड़ी, सिगरेट, शराब और पान या पान मसाले को खाना तो दूर हाथ तक नहीं लगाया। इस गांव में ना सिर्फ गांव वासी बल्‍कि उनके यहां बाहर से आने वाले अतिथि भी इन वस्‍तुओं का सेवन नहीं कर सकते हैं।

इस गांव की दुकानों पर इस तरह की किसी सामग्री की बिक्री नहीं होती। इस गांव के लोग अपने घर आने वाले रिश्‍तेदारों को भी पान तंबाकू के सेवन की इजाजत नहीं देते। इस बात के लिए गांव हरियाणा में ही नहीं राजस्थान और दिल्‍ली तक तंबाकू मुक्‍त गांव के रूप में प्रसिद्ध है। बाबा भगवानदास का मंदिर और समाधि बनी हुई है। कहते हैं धूम्रपान और नशे से बचने की ये परंपरा उन्‍होंने ही शुरू की थी।

खास बात ये है कि ये गांव जाट बहुल है जहां तंबाकू वाला हुक्‍का पीने का चलन काफी पुराना है पर इसके बावजूद इस गांव के किसी व्‍यक्‍ति को हुक्‍का गुड़गुड़ाने की आदत नहीं है। गांव के बुजुर्गों के अनुसार ये परंपरा 1947 के आसपास शुरू हुई थी, जब एक स्‍थानीय गुरूद्वारे के प्रमुख ने गांव वालों को इन व्‍यसनों से दूर रहने के लिए कहा था, जबकि कुछ इसे 90 साल से भी पुरानी परंपरा मानते हैं। बहरहाल अब ये परंपरा एक आदत और जागरुकता का बेहतरीन अभियान बन चुकी है।

हरियाणा का यह धूम्रपान वर्जित गांव हमारे देश के लिये एक मिसाल है.लोगों को इस गांव से सीख लेनी चाहिए की धुम्रपान से मुक्ति पाना नामुमकिन नहीं है.अगर कोई भी आदमी दिल से धूम्रपान से छुटकारा पाना चाहे तो वह इससे मुक्ति पा सकता है.धूम्रपान व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिये बहुत ही हानिकारक होता है साथ ही यह अपनों से दूर करता है. ये गाँव अपने आप में एक आदर्श गाँव का मॉडल है, मोदी जी इसे पुरे देश में लागु कर दो फिर देखो कैसे अपना देश आगे बढ़ता है.

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