एक पिता ने बयां किया अपना दर्द – मैं नहीं चाहता कि मेरा दुश्मन भी कभी इस दर्द से गुजरे

हर इंसान अपने जीवन में सुख – दुःख दोनों देखता है. जीवन में कभी उसे खुशियाँ मिलती हैं तो कभी ऐसे मौके भी आते हैं जब उसे दर्द झेलने पड़ते हैं. इंसान को सबसे ज्यादा खुशियाँ अपनों के साथ से मिलती हैं और सबसे ज्यादा दर्द किसी अपने के साथ छूटने पर होता है. किसी अपने की मौत के ख्याल भर से भी हमारे अंदर एक अजीब सी बैचेनी उत्पन हो जाती है.

lirin chako and jordan

भले ही मौत के बारे में सोचकर हम घबरा जाते हों लेकिन ये तो सच है जिसको हम बदल नही सकते. इसी से जुड़ा एक सवाल Quora पर पूछा गया. सवाल था – आपके लिए ज़्यादा तकलीफ़देह क्या है? अपने बच्चे को मरते देखना या फिर अपने माता-पिता को मरते देखना?

इंसान के लिए दोनों ही स्थिति तकलीफदेह होती हैं और इसका जवाब देना आसान नही है लेकिन इस सवाल के जवाब में एक पिता ने अपनी 31 महीने की बेटी की मौत का जो दर्द बयां किया है उसे पढ़कर आप भी कामना करेंगे की आपके दुश्मन भी कभी इस दर्द से ना गुजरना पड़े.

32 वर्षीय लिरिन चाको ने अपनी दुखभरी दास्तान सबके सामने बयां की है. लिरिन चाको ने लिखा है कि मेरी लाइफ में सब कुछ अच्छा चल रहा था. उन्होंने कभी भी कभी अपनी फ़ैमिली में किसी की मौत नहीं देखी थी, कभी भी शमशान घाट तक नहीं गए थे. उनके एक प्यारी सी बच्ची थी जिसका नाम उन्होंने जॉर्डन रखा था.

जॉर्डन जब 31 महीने की थी तब एक एक्सीडेंट हुआ, 6 दिन कोमा में रहने के बाद मेरी बेटी जॉर्डन को मौत हो गई. मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैं अपनी बेटी को दफ़नाने जा रहा था. मैं और मेरी पत्नी, दोनों ही चोटिल थे और ठीक से रो तक नहीं पा रहे थे. जॉर्डन की मौत ने हमारी लाइफ को बदल दिया था. हमारी लाइफ में एक सूनापन आ गया था.

हम हर महीने उसकी कब्र पर जाते, उससे घंटों बातें करते. हमने लोगों से मिलना-जुलना भी छोड़ दिया था. हम घर पर केवल टीवी देखते थे. हम हर रात सोने से पहले रोते थे और उम्मीद करते थे कि नींद में ही हमारी भी मौत हो जाये. हमने महसूस किया कि जीवन कितना बेकार है.

मेरे माता-पिता कभी भी हमारे दुःख को नही समझ सकते थे क्योंकि उनके बच्चे तो जिन्दा थे. वे हमेशां भगवान का शुक्रिया अदा करते की हम उस एक्सीडेंट में जिंदा बच गये लेकिन हम कोसते थे कि हम उसके साथ क्यों नहीं मर गए?

जैसे जैसे समय निकला हमारा दुःख थोड़ा कम हुआ. हम दोनों ही अपने-अपने काम मे मेहनत करने लगे. मेरी पत्नी नर्सिंग स्टूडेंट्स को पढ़ाती थी, वहीं मैं अपना खुद का बिज़नेस संभाल रहा था.

हमने दिन-रात प्रार्थना की. भगवान ने हमारी सुनी और हमारी ज़िंदगी में एक बार फिर एक छोटी बच्ची आई जिसका नाम हमने जेडिन रखा लेकिन अभी भी हम जॉर्डन को मिस करते हैं.

मैं भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि किसी भी माता-पिता को अपने बच्चे की मौत को ना देखना पड़े. ये दुनिया के सबसे दर्द भरे अनुभवों में से एक है जिससे निकल पाना आसान नही है. जब एक अभिभावक की मौत होती है, तो बच्चे को अपने नश्वर होने का एहसास होता है. वहीं जब एक बच्चा मरता है, तो अभिभावक अपना अमरत्व खो देते हैं.

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