राजस्थान में सांप्रदायिक हिंसा पर क्या कहती है भूमि अधिकार आंदोलन की फैक्ट फाइंडिंग टीम की रिपोर्ट

राजस्थान में साम्प्रदायिक हिंसा की जाँच के लिए भूमि अधिकार आंदोलन के बैनर तले बानी एक फैक्ट फाइंडिंग टीम ने 6 व 7 जनवरी को भरतपुर, अलवर, राजसमंद व उदयपुर का दो दिवसीय दौरा किया. फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जाँच के साथ ही अलवर व उदयपुर में सार्वजानिक जनसुनवाई का भी आयोजन किया गया जहाँ पीड़ितो ने अपनी बात टीम के सामने रखी. टीम ने अलवर व राजसमंद में जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक से भी मुलाकात की.

भूमि अधिकार आंदोलन की फैक्ट फाइंडिंग टीम में केरल से राज्यसभा सांसद व अखिल भारतीय किसान सभा(AIKS) के संयुक्त सचिव के.के.राघेश,पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से लोकसभा सांसद बड़ारूदोजा खान, बिहार से विधायक और ए आई के एम के नेता मेहबूब आलम, राजस्थान से पूर्व विधायक अमराराम, ए.आई.डब्ल्यू.यू के अध्यक्ष थिरुनावकरस, AIKS के संयुक्त सचिव विजू कृष्णन, केरल से पूर्व विधायक और AIKS के वित्त सचिव पी.कृष्णप्रसाद, सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेंद्रनाथ, रश्मिता, सुभाष चन्द्रन, एनएपीएम महाराष्ट्र से राष्ट्रीय आर्गनाइज़र बिलालखान, गुजरात से भूमि अधिकार आंदोलन के नेता मुजाहिदीन नफीस, किसान महासभा के उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह चौहान, ए.आई.के.एम.एस के केंद्रीय कमेटी सदस्य धिरेन्द्र भाउड़िया, भूमि अधिकार आंदोलन राजस्थान के नेता छगनलाल (किसान सभा), डॉ.संजय”माधव” (किसान सभा), सवाई सिंह जी (समग्र सेवा संघ,राजस्थान), मौलला हनीफ-अलवर, वीरेंद्र विद्रोही- अलवर (इनसाएफ) शामिल थे.

फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य 6 जनवरी को भरतपुर जिले के घाटमीका गाँव पहुंचे और उमर खान के परिवार से मिले, जिन्हे गौ-रक्षकों ने मार दिया था. टीम ने पाया की देश की राजधानी से करीब 120 किलोमीटर की दुरी पर स्थित ये गाँव उपेक्षा का शिकार है और यहाँ के लोग बुनयादी सुविधाओं जैसे सड़कों, अच्छे स्कूलों, स्वास्थय केंद्रों, पीने के पानी की आपूर्ति से वंचित है. उमर खान के परिवार की आर्थिक हालत बहुत ख़राब है. गाँव का हर घर दुग्ध उत्पादन से जुड़ा हुआ है और आजीविका के लिए गाय, भैंस व बकरियां पालते हैं.

घाटमीका गाँव के लोगों व समुदाय में नेताओं ने कहा कि पहले कभी यहाँ साम्प्रदायिक अशांति नहीं देखी गई, हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के लोग सदभाव से साथ रह रहे है लेकिन अब मेवात में सम्पूर्ण मुस्लिम समुदाय को अपराधी के रूप में दर्शाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है. पुलिस विभाग में भी कुछ लोग इन साम्प्रदायिक ताकतों से मिलकर काम कर रहे हैं.

घाटमीका के बाद टीम ने अलवर में 22 वर्षीय तमिल के परिवार से मुलाकात की. तमिल के परिवार का आरोप है कि पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर  तमिल की हत्या की है और कई दिनों तक FIR दर्ज नहीं की. अलवर के बाद टीम अगले दिन 7 जनवरी को राजसमंद पहुंची जहाँ पश्चिम बंगाल से मजदूरी करने आये अफ़राजुल की हत्या कर दी गई और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया था. टीम ने स्थानीय कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की. इसके बाद टीम उदयपुर पहूंची.

उदयपुर में टीम ने सार्वजानिक जनसुनवाई का आयोजन किया. जनसुनवाई में पीड़ित लोगों ने साम्प्रदायिक हमलों व पुलिस उत्पीड़न की बात कही और टीम में आये सांसदों से उनकी बात को संसद में उठाने की गुहार लगाई. जफ़र खान जिसकी प्रतापगढ़ में खुले में शौच कर रही महिलाओं की फोटोग्राफी का विरोध करने पर हत्या कर दी गई थी, की विधवा रशीदा बाई ने बताया की ना तो अपराधियों पर कोई कार्यवाही हुई है और ना ही सरकार ने कोई सहायता दी है. अल्पसंख्यक समुदाय से ऑटो ड्राइवर, सेवनिर्वित सरकारी कर्मचारियों, व्यापारियों व अन्य लोगों ने भी धमकी दिए जाने व साम्प्रदायिक हमलों की बात कही. उन्होंने बताया की पुलिस बिना किसी उचित प्रक्रिया अपनाये कभी भी घरों में घुस जाती है और झूठे मुकदमे बना गिरफ्तार कर लेती है.

हालाँकि फैक्ट फाइंडिंग टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट बाद में जारी करेगी लेकिन जो संक्षिप्त रिपोर्ट टीम ने जारी है उसमे टीम का मानना है की गौ-रक्षा के नाम पर हमले बढे है, साम्प्रदायिक हमलों व लव जिहाद के नाम पर हमलो में इजाफा हुआ है. टीम का मानना है कि राजस्थान में भाजपा सरकार कानून व्यवस्था बनाने में असफल हुई है और साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी इन मुद्दों पर चुप है.