सीकर फिर बनेगा बड़े किसान आंदोलन का केंद्र, गांव-गांव में हो रही है जबरदस्त तैयारी

सितंबर 2017 में राजस्थान में किसानों ने कर्जा माफी की मांग को लेकर बड़ा किसान आंदोलन किया था. लगातार 13 दिन तक शांति व मजबूती के साथ चले इस किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र सीकर बना. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमराराम, पेमाराम व अन्य किसान नेताओं के साथ सरकार ने बातचीत कर 50 हजार तक के कर्जा माफी की मांग मान ली. सरकार ने लिखित समझौते में कहा कि इसके लिए एक हाई-पॉवर कमेटी बनाई जाएगी जो दूसरे राज्यो में कर्ज माफी का अध्यन कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.

सरकार ने हाई-पॉवर कमेटी तो बनाई लेकिन 3 महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी सरकार कर्जा माफी के फैसले पर आगे नही बढ़ी है. ऐसे में एक बार फिर सरकार को झुकने के लिए राजस्थान में फिर बड़े किसान आंदोलन की तैयारियां चल रही हैं. इस बार भी इस किसान आंदोलन का केंद्र सीकर होगा. सीकर में किसान नेताओं ने आंदोलन की रणनीति तय कर ली है ओर उस पर काम करना भी शुरू कर दिया है

किसान नेता बड़ा किसान आंदोलन खड़ा करने के लिए गांव-गांव में प्रचार कर रहे हैं. गांवों में किसान संसद लगाई जा रही है. किसान संसद के माध्यम से सीकर में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमराराम व प्रदेशध्यक्ष पेमाराम किसानों से संपर्क कर रहे हैं. किसान संसद में किसानों को आन्दोलन की रूपरेखा बताई जा रही है. आंदोलन की पूरी रूपरेखा पेमाराम ने सीकर के भढाढर गांव में लगी किसान संसद में बताई. आप भी देखे…..

आंदोलन में ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ने के लिए किसान नेता अगले 2 महीने में हर एक किसान तक पहुंचने की कोशिश करेंगे. 2 महीने के प्रचार के बाद फरवरी में किसान अमराराम, पेमाराम व अन्य किसान नेताओ के नेतृत्व में पैदल जत्थों से जयपुर पहुंचेगे जहां बजट सत्र में विधानसभा का घेराव करने की तैयारी है.

अगले साल फरवरी में जयपुर कूच का ऐलान तो हो चुका है लेकिन अभी तक तारीख तय नही हुई है. जयपुर कूच की तारीख का ऐलान किसान नेता, राज्यपाल द्वारा बजट सत्र की तारीखों की घोषणा के बाद करेंगे.

अमराराम व पेमाराम जैसे बड़े किसान नेताओं का गृह-क्षेत्र होने के कारण सीकर जरूर आंदोलन का केंद्र बनेगा लेकिन आंदोलन की तैयारियां सिर्फ सीकर में ही नही चल रही है. सीकर के अलावा चूरू, नागौर, झुंझुनूं, बीकानेर, हनुमानगढ़, गंगानगर, जयपुर ग्रामीण, अलवर व अन्य जिलों में भी चल रही है.

तैयारियों को देखकर कहा जा सकता है की अगर राजस्थान में वसुंधरा सरकार कर्जा माफी के लिए किया समझौता लागू नही करती है तो फरवरी 2018 एक बड़े किसान आंदोलन का गवाह बनेगा.

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