वसुंधरा सरकार के 4 साल: वादे धवस्त, सरकार अपनी पीठ थपथपाने में मस्त

राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने 13 दिसंबर को झुंझुनू में अपने 4 साल के कार्यकाल के पुरे होने के उपलक्ष में जश्न मनाया. लोगों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शायद कोई बड़ी घोषणा कर सकती है, जिनमें किसानों के कर्जमाफी व 5 नये जिलो की घोषणा करने व अन्य कई उम्मीदे थी क्योंकि अगले साल चुनाव होने है. लेकिन उन्होंने लोगों की उम्मीदों पर पीनी फेर दिया. वैसे तो उन्होंने कुछ घोषणाये कि है परन्तु ये घोषणाये लोगों को संतुष्ट करने के लिये काफी नही है.

एक ओर सरकार अपनी कामयाबी का जश्न मना रही, दूसरी ओर राजस्थान में हर वर्ग अपनी मागों को लेकर विरोध कर रहा हैं. जैसे किसान, मजदूर, विद्यार्थी, बेरोजगार युवा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, डॉक्टर्स, शिक्षकवर्ग,राज्य कर्मचारी आदि. इसलिए यह बात किसी को गले से निचे नहीं उतर पाई की सरकार ने किस ख़ुशी में जश्न मनाया. सरकार से कोई भी वर्ग संतुष्ट नहीं हैं. लोग सड़क, पानी, चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधओं को भी तरस गये हैं.

वसुंधरा राजे ने कल सम्बोधित करते हुए कहा कि जो 50 सालों में नहीं हुआ वो हमने कर दिखाया यह हमारी कामयाबी है.लेकिन हकीकत यह है कि वह अपने दिए हुए वादे पुरे करने में नाकाम रही.

वसुंधरा सरकार द्वारा किये गये प्रमुख  वादे –
1. भ्रष्टाचार मुक्त भारत
2. महंगाई कम करना
3. बेरोजगारों को रोजगार
4. कालेधन को वापस लाना
5. किसानों को लागत से डेढ़ गुना ज्यादा मूल्य
6. 24 घंटे बिजली इत्यादि

वसुंधरा राजे की सरकार ने चुनावों से पहले जनता से जो वादे किये थे,वह किसी भी वादे को पूरा नहीं कर पाई है फिर भी वह जश्न मना रही है.

चार साल में सरकार द्वारा लागु की गई योजनाये –
राजे की सरकार ने जो योजनाये शुरू की वे योजनाये निम्न है-1.मुख्यमंत्री राजश्री योजना, 2.न्याय आपके द्वार योजना, 3.अन्नपूर्णा भंडार योजना, 4.राजस्थान सम्पर्क योजना, 5. ग्रामीण गौरव पथ योजना, 6. मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन योजना, 7.भामाशाह योजना, 8.भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना .

योजनाओं की जमीनी हकीकत –
राजस्थान सरकार ने योजनाये तो शुरु कर दी लेकीन उन्हें जनता तक पहुँचाने में असफल रही. हिंदी अखबार राजस्थान पत्रिका के सर्वे में जो सामने आया वह बहुत ही चिंताजनक है, लोगो के अनुसार सरकार जन कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार  तक करने में नाकाम रही,जिनकों  योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए उन्हें पता तक नही की अमुक योजना उनके लिये है.

चार साल में हुये आन्दोलन –
राजस्थान सरकार भले ही कामयाबी का जश्न मनाये, लेकिन सच्चाई से वे बच नहीं सकते क्योंकि इन चार सालो में हर क्षेत्र में उनके विरुद्ध आन्दोलन हो रहे  है. जैसे किसान आन्दोलन,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आन्दोलन, रोजगार के लिये युवा आन्दोलन, शिक्षक आन्दोलन, राज्यकर्मचारी आन्दोलन, डॉक्टर्स भी आन्दोलन कर रहे. गंभीर बात यह है की आन्दोलनकारियों के प्रति वसुंधरा सरकार द्वारा संवादहीनता का रैवया अपनाना. जब आन्दोलन उग्र हो जाता है,तब जाके सरकार उनसे वार्ता करती है ,लिखित में समझौता करती है, फिर उनसे मुकर जाती है.

स्कूलों के निजीकरण से शिक्षकों, अभिभावकों व ग्रामीणों में आक्रोश:-
राजस्थान सरकार अब स्कूलों का निजीकरण कर रही है, जिसका पुरजोर विरोध हो रहा है,क्योंकि सरकार ने वादा किया था की वे उन्ही स्कूलों को पीपीपी मोड के तहत निजी हाथों में सौपेगी जिनकी हालत बहुत ज्यादा खराब है, लेकिन पहले चरण में जिन 300 स्कूलों के नाम दिए गये थे ,उनमे कई स्कूल ऐसे है जहा बच्चे भी संख्या भी ज्यादा है व पढाई भी अच्छी हो रही है. जिस स्कूल के बच्चें अंग्रेजी में बात करते है, उस स्कूल को भी निजी हाथों में क्यों दिया जा रहा है यह समझ से परे हैं. सरकार द्वारा स्कूलों का निजीकरण करने से शिक्षकों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है,लेकिन सरकार सुनती कहा है.

राजस्थान सरकार के कार्यकाल के चार वर्ष पुरे हो चुके है, लेकिन अभी तक सरकार अपने किये गये वादों से काफी पीछे है. वसुंधरा सरकार अपने चार साल के कार्यकाल में राजस्थान की जनता की उम्मीदों पर खरा नही उतर पाई है. सरकार के पास अभी भी एक साल का वक्त है, जिसमें भी अगर वह जनता से किये गये वादो को पूरा करने में असफल रहती है तो उसके लिये अगले विधानसभा चुनाव में अपनी सियासी जमीन बचा पाना मुश्किल हो जायेगा.

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