जादव पायेंग: द फारेस्ट मैन ऑफ़ इंडिया, अकेले ही उजाड़ भूमि को बना दिया हरा-भरा जंगल

कहावत है “अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता” लेकिन द फारेस्ट मैन ऑफ़ इंडिया जादव पायेंग ने हमे दिखाया है कि एक अकेला इन्सान क्या कुछ नहीं कर सकता? बस उसमे अपना लक्ष्य पूरा करने का जूनून होना चाहिए. जादव पायेंग जिनको आज फारेस्ट मैन ऑफ़ इंडिया के नाम से जाना जाता है ने अकेले ही अपनी कड़ी मेहनत, लगन और ज़िद से एक उजाड़ भूमि को भी हरा-भरा जंगल बना दिया.

jadav payeng gets padam shri award

जादव पायेंग असम के जोरहट ज़िला के कोकिलामुख गांव के रहने वाले है. जादव पायेंग जब 16 साल के थे तब उनके इलाके में भयंकर बाढ़ आई जिसने सब कुछ तबाह कर दिया. बाढ़ की वजह से वहां की हरयाली तबाह हो गई, जंगल और नदी किनारों के इलाकों में आने वाले प्रवासी पक्षियों कि गिनती धीरे धीरे कम होने लगी, घर के आसपास दिखने वाले सांप भी गर्मी से मरने लगे.

जादव पायेंग से ये सब देखा नही गया और उन्होंने वन विभाग को इस बारे में चेताया लेकिन वन विभाग ने कोई एक्शन नही लिया. वन विभाग का रुख देखकर पायेंग ने खुद ही कुछ करने की ठानी.

उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी के तट के पास के एक वीरान द्वीप को चुना और वहाँ पेड़ लगाना शुरु कर दिया. तीन दशकों से पायेंग रोज उस टापू पर जाता और कुछ नये पोधों लगता. उनके सामने सबसे बड़ी समस्या इन पोधों को पानी देना थी. नदी से रोज पानी लाकर पायेंगे अकेले सभी पोधों को पानी नहीं दे सकता था. पायेंग ने एक तरकीब निकाली. उसने बाँस की एक चौखट हर पौधे के ऊपर खड़ी की और उसके ऊपर घड़ा रखा जिसमें छोटे छोटे सुराख थे. घड़े का पानी धीरे-धीरे नीचे टपक कर पोधों को सींचता, हफ़्ते भर तक, जब तक वो खाली न हो जाता.

इसके बाद अगले साल 1980 में जब गोलाघाट ज़िले के वन विभाग ने जनकल्याण उपक्रम के अन्तर्गत वृक्षारोपण कार्य जोरहाट ज़िले से 5 किमी दूर अरुणा चापोरी इलाके के 200 हेक्टेयर में शुरु किया तो पायेंग वहां बतौर मजदुर जुड़ गया. 5 साल के बाद उस अभियान की समाप्ति पर बाकि मजदुर चले गये लेकिन पायेंगे ने वहीं रुककर उन पेड़ों की देखभाल करने का निर्णय किया.

इसके बाद पायेंग ने उन पेड़ों की देखरेख के साथ-साथ नए पेड़ लगाना भी जारी रखा जिसका नतीजा ये निकला की एक उजाड़ भूमि अब एक घने जंगल में रूपांतरित हो गया है. पायेंगे वहीं जंगल में एक झोंपड़ी में अपनी पत्नी व 3 बच्चों के साथ ही रहते हैं. वहीं गाय व भैंस पालते हैं जिनका दूध बेचकर वे अपना घर चलाते हैं.

पायेंग के उनके इस काम के लिए कई बार सम्मानित किया जा चूका है. 22 अप्रैल 2012 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) में एक सार्वजानिक कार्यक्रम में JNU के उप-कुलपति सुधीर कुमार सोपोरी ने जादव पायेंग को “फॉरेस्ट मॅन ऑफ इंडिया” की उपाधि प्रदान की. 8 अप्रैल 2015 को भारत सरकार ने जादव पायेंग को पदम् श्री से सम्मानित किया.

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